Akshay Kumar and Ajay Devgn. (File Photo: IANS). Image Source: IANS News

June 30 : सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से पूरे देश में बॉलीवुड में चलती नेपोटिस्म को लेकर चर्चा शुरू हो गयी हैं। कैसे बॉलीवुड आउटसाइडर को खुले दिल से स्वीकारता नहीं है और उनके काम और मेहनत को वह प्यार नहीं देता जिसके वह हकदार होते हैं। ऐसे में कई सितारे जिन्होंने इस सेकंड हैंड ट्रीटमेंट को झेला है , उन्होंने खुल कर इस बारे में बात की है और अब ऐसा लग रहा था की बॉलीवुड में बड़ा बदलाव आने वाला है लेकिन फिर से एक बार बॉलीवुड के बिग्गिएस ने साबित कर दिया की अभी यह सपना पूरा करने में काफी लम्बा समय लगेगा। कल डिज्नी + हॉटस्टार ने 7 फिल्मो के रिलीज़ की घोषणा की और वहां पर एक बार फिर से नेपोटिस्म की जीत होती दिखाई दी।

बड़े सितारे और बड़े नाम हमेशा से इंडस्ट्री में ज्यादा इज्जत बटोरते आ रहे है और लोगों के इतने गुस्से के बाद भी यहाँ कुछ नहीं बदला हैं। कल , एक वर्चुअल कांफ्रेंस के माध्यम से सात बड़ी फिल्मो के रिलीज़ की घोषणा की गयी जिसमे अक्षय कुमार की लक्ष्मी बोम्ब , अजय देवगन की भुज - दी प्राइड ऑफ़ इंडिया ,आलिआ भट्ट की सड़क 2 , अभिषेक बच्चन की दी बिग बुल , स्वर्गीय एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की दिल बेचारा , विद्युत् जम्वाल की खुदा हाफ़िज़ और कुणाल खेमू की लूट केस शामिल हैं। इस कांफ्रेंस के लिए अक्षय , अजय , आलिआ और अभिषेक को बुलाया गया जबकि बाकी तीन फिल्मो की कास्ट को कोई सन्देश नहीं दिया गया।

यह बात खुदा हाफिज फिल्म के लीड एक्टर विद्युत् जम्वाल और लूट केस के लीड एक्टर कुणाल खेमू को अच्छी नहीं लगी और उन्होंने इंडस्ट्री में चलती आ रही यह साइकिल जिसमे सिर्फ बड़े नामो और स्टार किड्स को मिलती इज्जत के खिलाफ अपना गुस्सा निकाला।

विद्युत् ने लिखा, " यह एक बड़ी घोषणा हैं। 7 फिल्म रिलीज़ होने जा रही हैं लेकिन उसमे से सिर्फ 5 फिल्मो को इज्जत दी गयी , 2 फिल्मों को इसके बारे में न कुछ बताया गया और न ही उन्हें इस घोषणा के लिए बुलाया गया। यह अभी एक लम्बा रास्ता है। यह साइकिल अभी चलती रहेगी। "

वही कुणाल ने भी इसको लेकर अपना गुस्सा निकाला और लिखा, " इज्जत और प्यार माँगा नहीं कमाया जाता हैं। कोई न दे तो हम छोटे नहीं होते। बस मैदान खेलने के लिए बराबर दे दो छलांग हम भी ऊंची लगा सकते हैं।"

दोनों के ट्वीट खुल कर चिल्ला रहे है कि हमारी इंडस्ट्री में छोटे सितारों को कितना झेलना पड़ता है। उनको बड़े सितारों के जितनी इज्जत नहीं दी जाती भले ही उन्होंने एक के बाद एक अच्छी फिल्म दी हो। यह दिखाता है की बॉलीवुड में यह सब सदियों से चला आ रहा है और लोगों और इन एक्टर्स के इतने गुस्से के बाद भी यहाँ कुछ नहीं बदला हैं।

लगता है अभी इंडस्ट्री को सीखने के लिए और सुशांत जैसे कलाकार चाहिए जो अपनी जान देकर यह बदलाव लेकर आये और आखिरकार इंडस्ट्री सीखे की एक कलाकार को उसके परिवार से नहीं बल्कि उसके काम से जाना जाए।

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