Published On: Aug 15, 2019

गन्ने के खेत में भगवान कृष्ण की उंगली कट गई, जिसे देखकर दौपदी ने अपनी साड़ी का छोर फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया जिसके बाद खून निकलना बंद हो गया। दौपदी के ऐसा करने पर कृष्ण ने उनसे वादा किया कि जब भी ज़रूरत होगी वह उनकी सहायता करेंगे। बाद में कृष्ण दौपदी के चीर हरण के समय उनकी सहायता करते हैं। मान्यताओं के अनुसार जब यमुना ने यम को राखी बांधी तब मृत्यु के देवता ने उन्हें अजर-अमर रहने का आशीर्वाद दिया। ऐसा कहा जाता है कि इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जो भाई राखी बांधेगा और अपनी बहन की रक्षा करने का प्रण लेगा वह भी अजर-अमर हो जाएगा। अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार भगवान विष्णु ने द्वारपाल के तौर पर अपने भक्त और राक्षस राज बालि की रक्षा करने लगे। विष्णु की पत्नी लक्ष्मी एक साधारण महिला के वेश में अपने पति से मिलने और बालि के दरबार में शरण मांगने जाती हैं। लक्ष्मी ने बालि के हाथ में श्रावण मास की पूर्णिमा पर एक धागा बांधा और उनकी सुरक्षा की कामना की। बालि ने उनसे कुछ मांगने के लिये कहा और उसे पूरा करने का वादा किया। लक्ष्मी ने द्वारपाल की तरफ इशारा किया और उनकी पहचान को प्रकट किया। राणा सांगा की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी कर्णावती ने अपने बड़े बेटे विक्रमजीत को उत्तराधिकारी बनाकर मेवाड़ का शासन चलाया। बहादुर शाह जिसने विक्रमजीत को हराया, उसने एक बार फिर मेवाड़ पर हमला करने का फैसला किया। अपने राज्य को बचाने के लिये कर्णावती ने बादशाह हुमायूं को पत्र लिखकर सहायता मांगी और राखी भेजी। हुमायूं ने अपने सैन्य अभियान को रोका और मेवाड़ की तरफ चल दिया। दुर्भाग्य से हुमायूं देर से पहुंचे लेकिन उन्होंने बहादुर शाह की सेना को भगा दिया। कर्णावती ने जौहर किया, लेकिन हुमायूं ने उनके बेटे को मेवाड़ का राजा बनाया।  

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